वेद और विज्ञान
विज्ञान पर भारी वेद
हिग्स बोसॉन’ यानी गॉड पार्टिकल से मिलता-जुलता है जिससे माना जाता है कि ब्रह्मांड अस्तित्व में आया। सर्न के वैज्ञानिक ब्रह्मांड के इस रहस्य को सुलझाने के लिए
2008 से प्रयोग कर रहे थे।
प्रयोग में हमारा योगदान
1. इस खोज में भारत के 100
से अधिक वैज्ञानिक कई स्तरों पर शामिल रहे।
2. भारतीय वैज्ञानिक डॉ. अर्चना शर्मा महाप्रयोग में शुरू से ही शामिल रहीं।
3. एफिल टावर से ज्यादा भारी
8,000 टन के चुंबक के हिस्से भारत में बने।
देखे वेद की व्यापकता /
ऋग्वेद भाग -1 : –
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उत्तम क्षेत्र, उत्तम पथ तथा श्रेष्ट धन की अभिलाषा से हे अग्ने! हम तेरा पूजन करते है/ तू हमारे पापो को समाप्त करे/
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इस अग्नि की शत्रु -विजयी प्रवाल ज्वालाएं चारो ओर फ़ैल रही है / ऐसा अग्नि हमारे पापो को नष्ट करे/ पृष्ट संख्या 207
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अन्न एवम गोउ आदि धन से संपन्न करने वाले, बल से उत्पन्न हे जातवेदा( अग्ने) तू हमें भी धनादि से परिपूर्ण करे /
ऋग्वेद भाग 2 : –
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हे वृश्ता ! हम वीर , कर्मठ, कार्य कुशल सोम को सिद्ध करने तथा देवताओं की इच्छा वाला पुत्र उत्पन्न कर सके , इसके लिए तू हमें बल और पुष्ट से युक्त वीर्य प्रदान करे – पृष्ट संख्या 32
/ श्लोक – 9
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हे अग्ने ! माता पिता और मित्र के सामान तू हमारा हितैषी है/ जो हमारे शत्रु है , द्रोशी है या हमारे विरुद्ध आचरण करते है तू अपनी ज्वालाओ से भस्म करे दे / पृष्ट संख्या 53
/ श्लोक – 1
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हे ऐश्वर्यवान इन्द्र तू दिव्या वज्र को धारण करने वाला तथा सबको देखने वाला है/ हम धनाभाव से त्रस्त हुआ को तू अपने दोनों खुले हाथो से धन प्रदान करे/ पृष्ट संख्या
321 / श्लोक –
1
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हे देवताओं ! हम सभी प्रकार के विघ्न और बाधाओं से रहित होकर विस्तृत सुखो का उपभोग करे / पृष्ट संख्या 334
/ श्लोक –
16 /
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हे वरुण ! तू सभी के द्वारा वरण करने योग्य है/ यदि हमने कभी भी किसी मित्र , भरता, दाता , पडोसी या बधिर के प्रति कोई अपराध किया हो तो , वरुण, हमारे उस अपराध को क्षमा करे – पृष्ट संख्या 404 / श्लोक – 7
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हे ऐश्वर्यवान अग्ने ! तू हम पुत्र- पौत्रों और परिजनों से युक्त गृह प्रदान करे/ हम सबको पोषण और कल्याण करे/ हमें यशस्वी बनाएं / हमें निष्पाप और कल्याण के पथ पर चलने काबल प्रदान करे/ पृष्ट संख्या 411
/ श्लोक – 12
ऋग्वेद भाग 3 : –
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हे अंधकार नाशिक अंगे ! तू दिन -रात हमें पापो से बचाए तथा शत्रुओ से हमारी रक्षा करे / संख्या 44
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हे उषे ! तू अन्धकार को शमन करके सभी मनुष्यों को सदबुधि तथा उपयुक्त ऐश्वार्यादी प्रदान करे / संख्या
223 / श्लोक –
16
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यदि हम वाणी और हृदयों के स्वामी बन जाय तो हे इंद्र ! हम शिक्षा , सहायता तथा मनीषियों को दान देने वाले बन जाय / पृष्ट संख्या
238 / श्लोक – 2
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मनुष्यों ने जिन सुखो को पहले कभी प्राप्त नहीं किया था , उन सुखो की प्राप्ति करने के लिए वे आदित्यो से विनती करते है / संख्या
246 / श्लोक – 1
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शत्रुओ तथा दुर्बुधि के दुष्प्रभावो को दूर भगाने वाले हे आदित्यो ! तुम रोगों और पापो से हमें दूर करो / संख्या 248
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हमारे पुत्र और पौत्रों को हे आदित्यो ! तुम दीर्घायु प्रदान करने की कृपा करो / संख्या 249
हम उपरोक्त इच्छाओ के लिए ही वर्तमान मुर्ख गुरुओ के चक्कर में नहीं फंसते जा रहे है/ उपरोक्त इच्छाएं अभी विद्यमान नहीं है/ अगर है तो फिर वेद की प्रासंगिकता जस का तस है/
आज हिग्स बोसोन ने तत्वों में जो द्रव्यामान होता है उसे सत्यापन किया है/ लेकिन प्रश्न है इसमें द्रव्यमान देने क़ि शक्ति कहाँ से आई ? अर्थात फिर वही ब्रह्म तत्व/ फिर वही हिरण्यगर्भ और फिर वही ब्रह्मा/
सर्न के महानिदेशक -राल्फ ह्यूर : प्रकृति को समझना मील का पत्थर है/
इसका मानना है क़ि विश्व सुई के नोक के अग्रांश नोक पर विश्व आधारित है/
वैज्ञानिक विश्व रचना के लिय महाविस्फोट (बिग बंग ) सिध्यांत को आधार मानते है /
लेकिन वेद
– जल से /
इस प्रकार वेद विज्ञान और धर्म दोनों के धरोहर है / वैज्ञानिक खोज के लिए अरबो रुपे खर्च करते है /वेद उसे मंत्रणा और साधना के द्वारा प्रमाणित करते है/ हम बिना वेद के अस्तित्व क़ि कुछ भी कामना नही कर सकते है/

