भास्कर प्रथम
भास्कर प्रथम (600 ई – 680 ईसवी) भारत के सातवीं
शताब्दी के गणितज्ञ थे। संभवतः उन्होने ही सबसे पहले संख्याओं को हिन्दू दाशमिक पद्धति
में लिखना आरम्भ किया। उन्होने आर्यभट्ट की कृतियों पर टीका लिखी और उसी सन्दर्भ में
ज्या य (sin x) का परिमेय
महाभास्करीय
महाभास्करीय में आठ अध्याय हैं। सातवें अध्याय के
श्लोक १७, १८ और १९ में उन्होने sin x का सन्निकट मान (approximate value) निकालने
का सूत्र दिया है-
इस सूत्र को उन्होने आर्यभट्ट द्वारा दिया हुआ बताया
है। इस सूत्र से प्राप्त ज्या य के मानों का आपेक्षिक त्रुटि 1.9% से कम है। पर होता
है।) महाभास्करीय के कुछ भागों का बाद में अरबी में अनुवाद हुआ।
मख्यादिरहितं कर्मं वक्ष्यते तत्समासतः।
चक्रार्धांशकसमूहाद्विधोध्या ये भुजांशकाः॥१७
तच्छेषगुणिता द्विष्टाः शोध्याः खाभ्रेषुखाब्धितः।
चतुर्थांशेन शेषस्य द्विष्ठमन्त्य फलं हतम् ॥१८
बाहुकोट्योः फलं कृत्स्नं क्रमोत्क्रमगुणस्य वा।
लभ्यते चन्द्रतीक्ष्णांश्वोस्ताराणां वापि तत्त्वतः ॥१९

No comments:
Post a Comment