सरल प्रयोगों में समाहित विज्ञान


सरल प्रयोगों में समाहित विज्ञान


सच ही कहा गया है - आज की सभ्यता कलयुग की सभ्यता है " कल अर्थात मशीनों का युग | वास्तव में देखा जाए तो अभी जो समय चल रहा है वहां कलो का अर्थात मशीनों का युग ही है ना जाने अभी तक कितनी है मशीनों का निर्माण हो चुका है और आगे भी लगातार निर्माण कार्य चल ही रहा है|
आज विज्ञान ने मनुष्य को अपने ऊपर इतना आश्रित कर लिया है कि इसके बिना एक कदम भी बढ़ाए जाना संभव नहीं है व्यक्तिगत रूप से दिन प्रतिदिन के जीवन कार्य विज्ञान की मदद से ही होते हैं|
विज्ञान वहां व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार , अवलोकन ,अध्ययन और प्रयोगों से मिली है अभी हमारी शिक्षा पद्धति में केवल विज्ञान को विषय समझ कर पढ़ाया जाता है या यहां के सकते हैं कि शिक्षक केवल विज्ञान को अंको के लिए पढ़ाते हैं अभी हम विज्ञान का एक भाग पढ़ाते हैं यानी हम केवल अध्ययन कराते हैं ना तो हम विज्ञान मे अवलोकन कराते हैं और ना ही प्रयोग हम विज्ञान का अध्ययन तो करा पा रहे हैं पर क्या हम छात्रों को विज्ञान का व्यवहारिक ज्ञान भी दे पा रहे हैं ? ऐसा कहा जाता है कि विज्ञान के ज्ञान भंडार की बजाय वैज्ञानिक विधि( प्रयोग विधि , अवलोकन , प्रेक्षण )विज्ञान की असली कसौटी है

अब हमारे सामने प्रश्न आता है , कि प्रयोग कराने के लिए प्रयोगशालाओं का निर्माण कराया जाये | पर क्या वास्तव में प्रयोग आधारित विज्ञान पढ़ाने के लिए हमें बड़ी बड़ी प्रयोगशालाओं की आवश्यकता है …… नहीं ऐसा नही है, … … विज्ञान के प्रयोग तो हमारे आस-पास बिखरे पड़े हैं बस अब हमें जरूरत है तो उन्हें पहचानने की - रास्ते में विज्ञान है , बस्ते में विज्ञान है , पेंसिल ,कॉपी घर , चौबारे में विज्ञान है हमारे चारों ओर हर जगह विज्ञान विद्यमान है | हम कदम कदम पर विज्ञान का सामना करते हैं विद्यार्थियों को हमें उन सामान्य प्रयोगों पर आधारित सिद्धांतों को ही उपयोग में लाकर वैज्ञानिक परिदृश्य में ढालना होगा
हमारे घर में उपयोग आने वाली सामान्य सी सामग्री जो किसी कबाड़ से कम नहीं उन सामानों का उपयोग हम विज्ञान के सरल प्रयोग में कर सकते हैं | हम बड़ी आसानी से कागज , पानी , धागा , प्लास्टिक लकड़ी के गट्टे चुंबक , लोहे की रॉड, पेड़ की पत्तियां , रंग , कांच के गिलास, खिलौनों में लगने वाली विद्युत मोटर इत्यादि अनुपयोगी सामानों से विज्ञान के बहुत उपयोगी तथा प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित विज्ञानात्मक प्रयोग या सरल प्रदर्श का निर्माण कर सकते हैं इन विज्ञानात्मक प्रयोगों का खर्च किसी प्रयोगशाला के उपकरण से काफी कम होगा और साथ ही साथ विद्यार्थियों को विज्ञान के सिद्धांत बड़ी ही सरलता से खेल खेल में सिखाया जा सकेगा l इन प्रयोगों को विद्यार्थी स्वयं भी घर पर बना सकेंगे | यहां प्रयोग हमारी शिक्षण पद्धति को निखारने का कार्य करेंगे और हम विज्ञान को विषय ना मानकर विद्यार्थियों को रुचिकर शिक्षण प्रदान कर सकेंगे इन अनुपयोगी सामानों से जब विद्यार्थी प्रयोग या प्रदर्श तैयार करेंगे तो विद्यार्थियों में भी एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होगा जो आगे चलकर हमारे देश की उन्नति में सहायक होगा यह प्रयोग दिखने में बहुत सरल होंगे पर जब विद्यार्थी इनमें छिपे विज्ञान का अध्ययन करेंगे तो वास्तव में विद्यार्थी बहुत ही आनंद के साथ शिक्षण करेंगे| जिससे विद्यार्थियों के मस्तिष्क में एक जिज्ञासु प्रवृत्ति एंव वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होगा |


नवाचारी शिक्षक का नाम - पीयुष  राठौड़  सरस्वती विद्या मंदिर , राजगढ़  (मध्य प्रदेश )

नवाचार के लाभ  - 

·        छात्रों में वैज्ञानिक अभिवृति , जिज्ञासु  वृति  का विकास होगा !
·        छात्र प्राप्त ज्ञान को प्रयोग द्व्रारा नवीन परिस्थियों में प्रयोग कर सकते है !
·        प्रयोगो के द्व्रारा प्राप्त परिणामो को दैनिक जीवन में प्रयोग करना 
·        समस्यो की पहचान एंव उनके निदान करने की क्षमता का विकास  होगा 
·        प्रयोगो द्वारा प्राप्त परिणामो का विश्लेषण करना सीखना


प्रभाव का क्षेत्र –

विज्ञान कोई याद कर लेने वाले तथ्यों की सूची नहीं है। यह एक प्रक्रिया है - एक पद्धति है प्रश्न पूछने की, परिकल्पनाएँ गढ़ने की, निरीक्षण करने की, परीक्षण करने की, साक्ष्य तलाशने की, आँकड़े एकत्र करने की, विश्लेषण करने की, निष्कर्षों में बदलाव करने की, संवाद करने की, और फिर से सवाल करने की। विज्ञानं की इस प्रक्रिया को समझने के लिए विज्ञानं  के सरल प्रयोग बहुत सहयक हो सकते है छात्र जब इन विज्ञानं के प्रयोग को करेंगे तो वो निश्चित ही वैज्ञानिक सिद्धांतो को समझ पायेंगे जो आगे चल कर उन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास करेगा जिससे स्वंम ,समाज और देश का विकास होगा !

No comments:

Post a Comment